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फॉरेक्स मार्केट का उद्भव

फॉरेक्स मार्केट का उद्भव

परिचय:
फॉरेक्स मार्केट दुनिया का सबसे बड़ा वित्तीय बाजार है, जहां विभिन्न देशों की मुद्राओं का लेन-देन होता है। इस बाजार में प्रतिदिन खरबों डॉलर का व्यापार होता है। आइए इस लेख में जानते हैं कि फॉरेक्स मार्केट का उद्भव कैसे हुआ और यह कैसे विकसित होकर आज के रूप में स्थापित हुआ।

इस लेख में शामिल मुख्य बिंदु:

  1. बार्टर प्रणाली
  2. स्वर्ण मुद्राएं
  3. ब्रेटन वुड्स समझौता
  4. ब्रेटन वुड्स समझौते का पतन
  5. प्लाजा समझौता
  6. इंटरबैंक प्रणाली
  7. आज का फॉरेक्स मार्केट

1. बार्टर प्रणाली

बार्टर प्रणाली दुनिया की सबसे प्राचीन व्यापारिक पद्धतियों में से एक है, जिसका आरंभ लगभग 6000 ईसा पूर्व माना जाता है। इसे विदेशी मुद्रा व्यापार का आधार भी माना जाता है। इस प्रणाली में वस्तुओं का आदान-प्रदान किया जाता था।
समय के साथ, नमक, मसाले, फल आदि जैसी वस्तुएं, जो अधिक मांग में थीं, आदान-प्रदान के माध्यम के रूप में विकसित हुईं।
6वीं शताब्दी ईसा पूर्व में, स्वर्ण मुद्राओं का प्रचलन शुरू हुआ। अपनी पोर्टेबिलिटी, विभाजनशीलता, मानकीकरण और सीमित उपलब्धता के कारण स्वर्ण मुद्राएं धीरे-धीरे बार्टर प्रणाली का स्थान लेने लगीं।

बार्टर प्रणाली का उदाहरण:
प्राचीन समय में यदि आप एक किलो संतरे खरीदना चाहते, तो आपको उसके बदले कुछ देना होता, जैसे आधा किलो गेहूं। यानी, एक किलो संतरे के बदले आधा किलो गेहूं दिया जाता था। इसे ही बार्टर प्रणाली कहते हैं, जिसमें वस्तुओं का लेन-देन बिना मुद्रा के होता था।


2. स्वर्ण मुद्राएं

18वीं सदी के अंत तक अधिकांश देशों ने स्वर्ण मानक प्रणाली को अपनाया, जो यह सुनिश्चित करता था कि सरकारें कागजी मुद्रा के बदले सोना प्रदान करें।
यह प्रणाली प्रथम विश्व युद्ध तक प्रभावी रही, लेकिन युद्ध के खर्चों को पूरा करने के लिए यूरोपीय देशों ने स्वर्ण मानक को निलंबित कर दिया और अधिक कागजी मुद्रा जारी की।
इस प्रकार, प्रत्येक देश को अपनी कागजी मुद्रा प्रणाली विकसित करनी पड़ी, जिससे अलग-अलग देशों की मुद्राएं प्रचलन में आईं।

स्वर्ण मुद्रा प्रणाली का उदाहरण:
मान लें आपके पास 100 डॉलर हैं और आप इसे सोने में बदलना चाहते हैं। स्वर्ण मानक के अंतर्गत सरकार यह सुनिश्चित करती थी कि यह लेन-देन किया जा सके। लेकिन प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, कागजी मुद्रा का प्रचलन सोने की उपलब्धता से कहीं अधिक हो गया, जिससे स्वर्ण मानक प्रणाली समाप्त हो गई।


3. ब्रेटन वुड्स समझौता

ब्रेटन वुड्स समझौता जुलाई 1944 में न्यू हैम्पशायर, अमेरिका के ब्रेटन वुड्स में संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैश्विक वित्तीय प्रणाली को पुनर्गठित करना था।
यह समझौता एक स्थिर विनिमय दर प्रणाली की स्थापना करता है, जहां सभी मुद्राएं अमेरिकी डॉलर से जुड़ी थीं और अमेरिकी डॉलर को सोने से जोड़ा गया था।
इस समझौते ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं की स्थापना की, जो विनिमय दरों को स्थिर रखने और आर्थिक विकास में मदद करने के लिए बनाई गई थीं।


4. ब्रेटन वुड्स समझौते का पतन

1971 में, ब्रेटन वुड्स प्रणाली का पतन हुआ। वियतनाम युद्ध के लिए अमेरिका द्वारा किए गए खर्चों के कारण डॉलर पर से विश्वास उठ गया।
इस घटना के बाद, कई देशों ने फ्लोटिंग एक्सचेंज रेट प्रणाली को अपनाया, जिसमें विनिमय दर बाजार की आपूर्ति और मांग पर निर्भर करती है।


5. प्लाजा समझौता

1980 के दशक में अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने तीसरी दुनिया के देशों पर कर्ज का बोझ बढ़ा दिया और कई यूरोपीय फैक्ट्रियां प्रतिस्पर्धा न कर पाने के कारण बंद हो गईं।
1985 में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, पश्चिम जर्मनी और जापान ने न्यूयॉर्क के प्लाजा होटल में एक गुप्त बैठक की। इस बैठक में गैर-अमेरिकी मुद्राओं जैसे येन और मार्क को मजबूत करने का निर्णय लिया गया। यह समझौता "प्लाजा समझौता" के नाम से प्रसिद्ध हुआ।


6. इंटरबैंक प्रणाली

इंटरबैंक प्रणाली दुनिया के प्रमुख बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच एक नेटवर्क है। यह प्रणाली बैंकों के बीच लेन-देन को सुगम बनाती है।
इस प्रणाली में लगभग 2000 बैंक और वित्तीय संस्थान शामिल हैं, जो फॉरेक्स मार्केट के कुल व्यापार का 34% से अधिक नियंत्रित करते हैं।


7. आज का फॉरेक्स मार्केट

इंटरनेट के आगमन के साथ, फॉरेक्स ट्रेडिंग तेजी से लोकप्रिय हो गया। बैंकों ने तरलता प्रदान करके फॉरेक्स मार्केट को संगठित किया।
डिजिटल ब्रोकरों के माध्यम से व्यक्ति अब आसानी से ट्रेडिंग में भाग ले सकते हैं। आज, निवेशक अपने स्मार्टफोन का उपयोग करके फॉरेक्स मार्केट में शामिल हो सकते हैं।


निष्कर्ष:
फॉरेक्स मार्केट ने स्वर्ण मानक, ब्रेटन वुड्स प्रणाली और प्लाजा समझौते से लेकर बार्टर प्रणाली तक अनेक बदलाव देखे हैं। ये परिवर्तन वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों की प्रगति का प्रमाण हैं।

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